pyari ma
माँ इस तरह मेरे गुनाहों को वो धो देती है, माँ गुस्से में होती है तो रो देती है।
जावेद अख्तर साहब कहते हैं... यहां जाना, वहां जाना, इससे मिलना, उससे मिलना हमारी जिंदगी ऐसी है जैसे रेलवे स्टेशनों पर अपने-अपने डिब्बे ढूंढते कोई मुसाफिर हों।