कठिन है मेरे लिए
जिंदगी की डायरी
और उसके कोरे पन्ने
उनमे बिखरी धुंध
उनमे बिखरी धुंध
जो छंटने का नाम ही नहीं ले रही
बहुत हो गया
अब उसे धो-पोंछकर
साफ कर देना चाहता हूं
अब उसे धो-पोंछकर
साफ कर देना चाहता हूं
ताकि लिख सकूं
नई इबारतें
इबारतें आंसू बहाते प्रेम की नहीं
उस प्रेम की
जिसकी ध्वनि-तरंगों में
समाहित हो जाए
ये धरती और सारा आसमान
पहाड़-नदियां-झरने
और वो सब कुछ
जिसे पाना सामान्य मनुष्य के बतौर
कठिन है मेरे लिए.

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