ज़िद पर अड़े रहो... खड़े रहो.

कितनी भी कठिनाई क्यों न आए, जीवन को रुकना नहीं चाहिए चलते रहना चाहिए।  कुछ ऐसी ही कहानियां लेकर इस बार अमिताभ बच्चन केबीसी में आए हैं। एकदम दबे-कुचले, अंतिम पंक्ति और गांव-देहात की प्रतिभाएं, जिन्हें कभी मंच नहीं मिला। उन्हें केबीसी मंच दे रहा है। यहां से जो भी प्रतिभागी रकम जीतकर जाते हैं, वह अपने सपनों को पूरा करते हैं।

इससे एक बात तो तय है इस देश में हर किसी के लिए अवसर उपलब्ध हैं। बस हाथ बढ़ाकर उसके लपक लेने की है। केबीसी की थीम है, जिद पर अडे रहो, खड़े रहो। मैं इसे थोड़ा दूसरी तरह से लेता हूं ज़िद है तो जज्बा होना जरूरी है और जज्बे के साथ जुनून का होना उतना ही जरूरी है। तभी आप वहां पहुंच पाएंगे जहां आप पहुंचना चाहते हैं। कुछ-कुछ एपिसोड मैंने ऐसे भी देखे हैं, जिसमें ऐसे प्रतिभागी आए, जो हिम्मत हार चुके थे लेकिन केबीसी उनके लिए सहारा बन गया और वह जीवन में आगे बढ़ गए। 

असल में यह जो बाजार है, वह मशीनी हो गया है। जब तक इंसान के पास रुपए नहीं है, पैसे नहीं है ताकत नहीं है, पावर नहीं है। तब तक उस मशीन को आयल नहीं मिलता, और तब वह चल नहीं पाती है। मशीन पड़ी रहती है उसमें जंग लग जाती है और कभी-कभी तो खत्म हो जाती है। इसलिए उम्मीद आख़िरी सांस तक बनी रहनी चाहिए। जीवन के खत्म होने के पहले तक क्योंकि उसी उम्मीद से हम एक बार फिर उठ कर खड़े हो जाते हैं और जीवन में चल पड़ते हैं अपनी मंजिल पाने के लिए। इसी उम्मीद का नाम है कौन बनेगा करोड़पति केबीसी !! So let's play...

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